गौरव सूरजपुर का
विंध्य की गोद में सोई, अनुपम छटा निराली है,
महानदी की निर्मल धारा, लाती यहाँ खुशहाली है।
दण्डबुल्ला और सूर्यपुर था, जिसका वैभवशाली इतिहास,
सूरजपुर की पावन माटी, रचती नित नया विश्वास।
सरगुजा के अंचल से जन्मा, यह अनुपम भू-भाग प्रिय,
सूरजपुर की पावन माटी, सबको लगती बेहद प्रिय।
कुदरगढ़ की ऊँची चोटी पर, है माँ बागेश्वरी का धाम,
श्रद्धा से झुकता मस्तक है, मिलता पल में मन को विश्राम।
रकसगंडा के जलप्रपात में, झर-झर झरता राग नया,
तमोर पिंगला के जंगल में, पत्थरों का है बाग नया।
साल और सागौन के वृक्ष यहाँ, जो झूम रहे हैं चारों ओर,
इस पावन हरियाली अंचल में, नाच रहे हैं वन में मोर।
गोंड़, पण्डो और चेरवा की, यह सुंदर अद्भुत थाती है,
करमा, सुआ और सैला धुन पर, उमंग जगाती यह माटी है।
सरल हृदय और सहज भाव है, यहाँ के सीधे लोगों में,
अमृत-रस घुला हुआ सा है, यहाँ के मीठे बोलों में।
खेतों की सोंधी खुशबू में, यहाँ श्रम की सच्ची कहानी है,
महानदी और रेण की लहरों में, बहता कल-कल पावन पानी है।
सुदूर दक्षिण के आँचल में पावन, शिवपुर की सुन्दर गुफा महान,
प्राकृतिक जल से अभिषिक्त, विराजमान हैं भोले भगवान।
कुम्दा-गुरमाता की पावन महिमा, साऊब का अद्भुत कोना,
कण-कण में मर्यादा बसती है, राम नाम का सुंदर गहना।
पूर्व दिशा के पावन पथ पर, वैभव का उजियारा है,
देवीपुर में माँ महामाया ने, अपना रूप सँवारा है।
पश्चिम में सरसोर की महिमा, गंगा जैसी पावन धार,
लहरें छूकर पावन करतीं, भोले का नित ही श्रृंगार।
इस तपोभूमि में ऋषि-मुनियों की, भक्ति का बहता मधुमास,
पश्चिम की यह पावन माटी, लाती जीवन में उल्लास।
सूरजपुर घाटी का, कण-कण एक अनमोल रत्न,
शत-शत नमन है तुझको सुंदर, जय-जय छत्तीसगढ़ के चमन!