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भूत ...

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( अंद्विश्वास की कुरीतियों को दूर करने के लिए एक कथा भूत ... । ) आँधी व घटा तो आती ही रहती थी पर जिस दिन श्याम बाबू अपने बेटे को खेल सिखाने के लिए खेल के मैदान में ले जा रहे थे । उस दिन इतनी भयंकर आँधी आई की श्याम बाबू चल न सके , अचानक गिर पड़े । उन्हें देखकर कुछ ऐसा प्रतीत हो रहा था    मानो  निष्प्राण है पर   उनकी सहसा आँखें खुली तो देखा   एक बूढी औरत उनके करीब आ रही थी ।  श्याम बाबू भय रहित आँखों से पर्दा हटाया और लोहा लेने के लिए तैयार हो गए । उनके इस वीरता को देख वह बूढी औरत काफूर हो चली  . .. आखिर श्याम बाबू को संदेह हो गया कि 'भूत' ही है । वे उतना भूत -प्रेतों से   परिचित नहीं थे , बस इतना सुना  था कि एक व्यक्ति के मर जाने पर उसके बदन पर असुर वृत्तियों  के सूचक  और पंजे थे। आप-बीती  से   सहमें ... बस उसी को नज़र में बसाते ... । की ओ ...... । खेल का मैदान ...... मेरा पुत्र .. और... वह बुढ़िया ... । वह कोई जादू तो नहीं ... वे मन को घोड़ें की तरह दौड़ने लगे ... । आखिर उनके साथ ऐसी पहली घट...

हम कलियुग के प्राणी हैं

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             हम कलियुग के प्राणी हैं सतयुग, त्रेता न द्वापर के, हम कलयुग के प्राणी हैं। हम सा प्राणी है किस युग में? हम अधमदेह धारी हैं।। हमारा युग तोप-तलवार जन-विद्रोह का है। सामंजस्य-शांति का नहीं, भेद-संघर्ष का है।। हमने सदियों वसुधैव कुटुंबकम् की भावना छोड़ दिया। और कलि के द्वेष - पाखंड से नाता जोड़ लिया।। हम काम, क्रोध, लोभ में कुटिल हैं। पर धन, पर नारी निंदा में लीन हैं।। हम दुर्गुणों के समुद्र में कुबुद्धि के कामी हैं। सतयुग, त्रेता न द्वापर के, हम कलयुग के प्राणी हैं।। हमारा हस्त खूनी पंजों का, क्या वे हमसे भिन्न स्वतंत्र रह पाएंगे? जब सुर सजेगा बम धमाकों का, मृत उन -मृत के लघु गीत गाएंगे।। हमें तुम्हारे नारद की वीणा अलापते नहीं लगती। हमें तुम्हारे मोहन की मुरली सुनाई नहीं देती।। तुम कहते हो हमें अबंधन जीने दो। अन्न जल सर्व प्रकृत का आनंद रस पीने दो।। नहीं, हम ही इस कलिकाल में सुबुद्धि के प्राणी हैं। सतयुग, त्रेता न द्वापर के, हम कलयुग के प्राणी हैं।। शिवराज आनंद   (मुक्त छंद )             ...

बेवफ़ा 'अपनों के लिए...

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बेवफा !  अपनों के लिए ...      ओ ' धन्य ' जिसने आंख बन्द होते हुए भी दुनिया के  हसीन  नजारों को  देख लिया था .          सात  सुरों के  संगीत  को  अपने  सांसो  मे  बसा  लिया था पर उसके  असल जिंदगी का  अंजाम क्या  हुआ? जो  नम्रता  के  साथ  प्यार - वयार  के चक्कर में  था भूल गया था कि ऐसेे  रेत का महल  बनाने से  क्या फायदा  जो   खुद  -ब- खुद  टूट  के  बिखर  जाये .उसे एहसास  ही नही  था कि  एक दिन   नम्रता  उससे  दूर ...दूर  दुनिया  मे गुम  हो  जायेगी . आखिर  ऐसा  क्या  हुआ  उसके   साथ?             हैलो,  नम्रता  कैसी हो ...?                               धन्य  ने  तार के  सहारे ...