Tuesday, September 5, 2023

पर - कल्याण

क्षुधित कंठ, व्याकुल नयन, विप्रदा की है मार,
अकिंचनता के तिमिर में, सिसक रहा संसार।
सूनी छत और टूटा आँगन, सहते ठंडा घाम,
ग़रीबों का इस दुनिया में, कोई न लेता नाम।
पर-हित में जो जी सके, वही मनुज गतिमान,
सच्ची मानवता यही, जीवें पर-कल्याण।
औरों के हित जीना सीखो, छोड़ो स्वार्थ अपार,
दीन-हीन के कष्ट का, जो बन सके आधार।

शिवराज आनंद

व्यक्तिगत जानकारी- नाम: शिवराज आनंद (लेखन नाम)- पूरा नाम: शिव कुमार साहू- जन्म तिथि: 4 मई, 1987- जन्म स्थान: सोनपुर, तहसील रामानुज नगर, सूरज...