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सेवा संकल्प अभियान 2026

किरणेश तिथि सप्त दश से                  मही पर राष्ट्र अर्चन दीप जला भाद्रपद के नव विहान से              आश्विन तक यह दिव्य अनुष्ठान चला शरद वत्सर पंचविंशति की साधना से               जग का हुआ भला श्रमिक स्वेद अंबु से सिंचित धरणी पर              प्रकटी सेवा की कला ऊर्जस्वित नव तरुण बढ़े हैं             नव्य इला का दिव्य श्रृंगार किए पावनता शुचिता समरसता का                     अंतस में दृढ़ संकल्प लिए शक्र धनुष से दीप्त विहान पर                     जाग उठी मानव की प्रीत।  अखंड पुरुषार्थ की वेदी पर                       गूंज उठा पावन नव गीत।। 

शिक्षक वही है

       शिक्षक  वही है जो तिमिर हरकर हृदय में, ज्ञान का नव भोर कर दे, जो ढलते हुए संकल्प में, अटूट धैर्य और संबल भर दे। परस्पर सहयोग की पावन रीती से, जो सबको जोड़ता है, विपदाओं के थपेड़ों में भी, जो मुड़ना और लड़ना सिखाता है, जो अज्ञान रूपी पाषाण को तराश कर गढ़ दे, वास्तव में शिक्षक वही है।

आज की जनधारा का हार्दिक आभार 🙏

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शिवराज आनंद

नाम: शिवराज आनंद मूल नाम: शिव कुमार साहू) जन्म स्थान: सोनपुर, विकास खण्ड -रामानुज नगर  जिला -सूरजपुर छत्तीसगढ़ 497229 जन्म तिथि: 04 मई 1987 माता-पिता: विश्वनाथ और पार्वती धर्म पत्नी: कृष्णी कुमारी शिक्षा:वि.अ.(हिंदी भाषा) व्यवसाय: लेखक, कवि शौक: पढ़ना, लिखना, खेलना रुचि: साहित्य के प्रति अनुभव: दो दशक से साहित्य लेखन उपलब्धियां: साहित्यिक रचनाएं:स्नातक विधा – गद्य और पद्य साहित्य कृतियां – जीवन की सोच, मेरी आवाज, जिओ उनके लिए, मां की महिमा, प्रेम -जगत, हम कलियुग के प्राणी हैं, घर का भेद, जगत का जंजाल -संसृति, यहां उनका भी दिल जोड़ दो, उठो युवा तुम उठो ऐसे, मानवता के डगर पे, बेवफा अपनों के लिए ,सोनपुर महिमा । - राष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान 2020,  -सच की दस्तक(राष्ट्रीय मासिक पत्रिका) द्वारा'उत्कृष्ट लेखन सम्मान 2020 (सर्टिफिकेट नंबर 0084SKD) - फेस ऑफ इंडिया अवार्ड 2021 - नेशनल आइकन अवार्ड 2022 - श्री राघव सामान 2024 - अंतर्राष्ट्रीय आइकन अवार्ड 2025 20 जुलाई 2026 को आडिटोरियम भवन सूरजपुर में आज की जनधारा अखबार के कार्यक्रम में सम्मानित ,स्मृति चिन्ह् अंतर्राष्ट्रीय प्रकाशन: ऑस्ट्र...

न बदले की भावना से

बदले की सुलगती आग में, तुम ख़ुद को न जलाना, प्रतिशोध की इस तीव्र आँधी में, न विवेक को गँवाना। जो बोए शूल राहों में, उसे तुम माफ़ कर देना, कटुता के घने अंधियारे में, स्नेह का दीप जलाना। प्रतिशोध से न आज तक कोई सुखी हुआ है, मानवता का आँचल बस क्षमा से ही धुला है। ये नफ़रत मन को डसती है, इसे तुम पास न लाना, क्षमा की पावन सरिता में, बैर का मैल बहाना। जहाँ प्रतिशोध की चेतना, वहाँ श्मशान होता है, क्षमा की छाँव में ही तो, सुखी इनसान होता है। मिटाकर बैर के छालों को, तुम बस प्रेम को चुनो, हृदय में जिसके करुणा हो, वही भगवान होता है।                                          - शिवराज आनंद                                         (सर्वाधिकार सुरक्षित) 
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सच की दस्तक ने मुझे उत्कृष्ट लेखन अवार्ड से सम्मानित किया उनका बहुत बहुत आभार 🙏🙏🙏  

मेरे प्यारे भारत और दुनिया में बसे सभी दोस्तों, पाठकों और भाई -बहनो को होली की ढेर सारी शुभकामनाएं...