Tuesday, November 3, 2026

सद्भाव का सबेरा

   सद्भाव का सबेरा
स्नेह-सलिल की बहे नदिया,
मिटे द्वेष की मलिन घड़ियाँ।
नीले नभ में प्रेम छाए,
सारे जग में उजाला भर जाए।
सत्य, सुसंस्कृत, सुंदर बोल,
खोलें बंद दिलों के द्वार अनमोल।
लोचन-मन में करुणा जागे,
हर मन से अब बैर भागे।
जीवन-उपवन महक उठे अब,
हाथ मिलाकर चलें यहाँ सब।
अमृत-सम मीठा वचन सुनाएँ,
घर-आँगन खुशियों से सजाएँ।
सूरज-सी किरणें बिखेरें,
भटके राही की राहें सँवारें।
पावन धरती स्वर्ग बन जाए,
मुस्कान हवा में तैरती आए

Friday, October 30, 2026

भीड़ में अंतर्मन

      भीड़ में अंतर्मन
दौड़ रही है रोज जिंदगी,
छूट रही पीछे आवारगी।
भीड़ भरी इस व्यस्त डगर में,
सुकूँ ढूँढता मन हर पल में।
चमक-दमक की दुनिया झूठी,
सच्ची चाहत सबसे रूठी।
सहज प्रेम जो हृदय से भाए,
वही थके इस मन को भाए।
                 (सर्वाधिकार सुरक्षित🔏)

Sunday, October 11, 2026

शिवराज आनंद

व्यक्तिगत एवं शैक्षणिक पृष्ठभूमि
  • उपनाम: शिवराज आनंद
  • पूरा नाम: शिव कुमार साहू
  • जन्म तिथि: 4 मई, 1987
  • जन्म स्थान: सोनपुर, तहसील रामानुजनगर, सूरजपुर, छत्तीसगढ़, भारत
  • शिक्षा: स्नातक हि.
📚 प्रमुख साहित्यिक कृतियाँ
  • जीवन की सोच
  • मेरी आवाज़
  • जियो उनके लिए
  • माँ की महिमा
  • प्रेम-जगत
  • हम कलियुग के प्राणी हैं
  • घर का भेद 
  • जगत का जंजाल -संसृति
  • यहाँ उनका भी दिल जोड़ दो
  • उठो युवा तुम उठो ऐसे
  • मानवता के डगर पे
  • बेवफा अपनों के लिए
  • माता विसर्जन
  • रावण का उद्घोष- तुममे अभी शेष हूँ
  • पर- कल्याण

🌐 प्रकाशन एवं मीडिया उपस्थिति
  • अंतर्राष्ट्रीय प्रकाशन: ऑस्ट्रेलिया की अग्रणी हिंदी ई-पत्रिका 'ऑस्ट्रेलिया अंचल' में उनकी बेहद लोकप्रिय रचनाओं "जियो उनके लिए" और "हम कलियुग के प्राणी हैं" (We are creatures of Kaliyuga) का सफल प्रकाशन हुआ है।
  • डिजिटल उपस्थिति:  विकिपीडिया (Wikipedia), साहित्यपीडिया (Sahityapedia), ई-पुस्तकालय (ePustakalay) और कई अन्य प्रमुख साहित्यिक पत्रिकाओं में उपलब्ध हैं।
🏆 पुरस्कार एवं सम्मान:-
  • इंटरनेशनल आइकॉन अवार्ड (2025)
  • श्री राघव सम्मान (2024)
  • फेस ऑफ इंडिया अवार्ड (2022)
  • नेशनल आइकॉन अवार्ड (2021)
  • राष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान (2020)
🆔 आधिकारिक पंजीकरण विवरण
छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग और अन्य साहित्यिक डेटाबेस में उनका आधिकारिक पंजीकरण इस प्रकार है:
  • चिन्हांकित पंजीकरण संख्या (Chinhaari Reg. No.): छत्तीसगढ़ संस्कृति विभाग द्वारा प्रमाणित (छवि विवरण के अनुसार)
  • TKN पंजीकरण संख्या: TKN202200003718
  • अन्य पंजीकरण संख्या: KSMLYU201905023

Sunday, September 20, 2026

सेवा संकल्प अभियान 2026

किरणेश तिथि सप्त दश से मही पर राष्ट्र अर्चन दीप जला,
भाद्रपद के नव विहान से आश्विन तक यह दिव्य अनुष्ठान चला।
शरद वत्सर पंचविंशति की साधना से जग का हुआ भला,
श्रमिक स्वेद अंबु से सिंचित धरणी पर प्रकटी सेवा की कला।
ऊर्जस्वित नव तरुण बढ़े हैं नव्य इला का दिव्य श्रृंगार किए,
पावनता शुचिता समरसता का अंतस में दृढ़ संकल्प लिए।
शक्र धनुष से दीप्त विहान पर जाग उठी मानव की पावन प्रीत,
अखंड पुरुषार्थ की वेदी पर गूंज उठा सुंदर मंगल नव गीत।

Friday, September 4, 2026

शिक्षक वही है

       शिक्षक  वही है
जो तिमिर हरकर हृदय में, ज्ञान का नव भोर कर दे,
जो ढलते हुए संकल्प में, अटूट धैर्य और संबल भर दे।
परस्पर सहयोग की पावन रीती से, जो सबको जोड़ता है,
विपदाओं के थपेड़ों में भी, जो मुड़ना और लड़ना सिखाता है,
जो अज्ञान रूपी पाषाण को तराश कर गढ़ दे, वास्तव में शिक्षक वही है।

Saturday, October 18, 2025

रावण का उद्घोष: "मैं तुममें शेष हूँ"

काष्ठ और तृण के ढाँचे को, तुमने पावक में झोंक दिया,
लपटों की भीषण ज्वाला ने, मेरा नश्वर तन सोख लिया।
तुम विजय-नाद का दंभ लिए, हँसते हो अपनी अज्ञानता पर,
पर ध्यान से देखो राख मेरी, मैं आज भी तुममें शेष हूँ।
जो दंभ तुम्हारे मानस में, जो लोभ तुम्हारे नयनों में,
मैं श्वास ले रहा हूँ अब तक, उन काम-क्रोध के स्पंदनों में।
तुम जिसे मरा समझ बैठे हो, वह मेरा अंतकाल नहीं,
हर कलुषित सोच के साए में, मैं युग-युग से तुममें शेष हूँ।
तुम प्रतिवर्ष जलाते हो मुझे, अपनी दुर्बलता छिपाने को,
एक झूठे आत्म-संतोष तले, अंतस की मलीनता दबाने को।
जब तक ईर्ष्या, छल और कपट, इस मानव-मन का हिस्सा है,
तब तक यह रावण मरा नहीं, मैं जीवित ही तुममें शेष हूँ।
मत करो ढोंग इस विजय का, तुम पराजित हो अपने मन से,
मैं अमर तत्व बन व्याप रहा, इस कलयुग के कण-कण में।
जब तक न मिटेगी पाशविकता, तब तक मेरा अवसान नहीं,
पहचानो अपने भीतर मुझे, मैं तुममें शेष हूँ।
 

सद्भाव का सबेरा

   सद्भाव का सबेरा स्नेह-सलिल की बहे नदिया, मिटे द्वेष की मलिन घड़ियाँ। नीले नभ में प्रेम छाए, सारे जग में उजाला भर जाए। सत्य, सुसंस्कृत, सु...