Sunday, October 11, 2026

शिवराज आनंद

व्यक्तिगत जानकारी- नाम: शिवराज आनंद (लेखन नाम)- पूरा नाम: शिव कुमार साहू- जन्म तिथि: 4 मई, 1987- जन्म स्थान: सोनपुर, तहसील रामानुज नगर, सूरजपुर, छत्तीसगढ़- शिक्षा: स्नातक। साहित्यिक जानकारी- विधाएं: गद्य और पद्य- प्रमुख रचनाएं:- जीवन की सोच- मेरी आवाज़, जियो उनके लिए ,माँ की महिमा,प्रेम-जगत,हम कलियुग के प्राणी हैं, घर का भेद,जगत का जंजाल - संसृति, यहाँ  उनका भी दिल जोड़ दो, उठो युवा तुम, ऐसे उठो, मानवता की डगर पर, रावण का उद्घोष: "मैं तुममें शेष हूँ"  बेवफा अपनों के लिए , माँ कि महिमा, सेवा संकल्प अभियान 2026, पर कल्याण, माता विसर्जन,आदि। पुरस्कार और सम्मान- राष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान ,नेशनल आइकॉन अवार्ड, 'फेस ऑफ इंडिया' अवार्ड,  नेशनल आइकॉन अवार्ड,र राघव सम्मान, इंटरनेशनल आइकॉन अवार्ड, सच की दस्तक- बेस्ट लेखन अवार्ड, प्रमुख हिंदी ई-पत्रिका 'ऑस्ट्रेलिया अंचल' में "उनके लिए जियो" और "हम कलियुग के प्राणी हैं" जैसी रचनाएं प्रकाशित।

Sunday, September 20, 2026

सेवा संकल्प अभियान 2026

किरणेश तिथि सप्त दश से मही पर राष्ट्र अर्चन दीप जला,
भाद्रपद के नव विहान से आश्विन तक यह दिव्य अनुष्ठान चला।
शरद वत्सर पंचविंशति की साधना से जग का हुआ भला,
श्रमिक स्वेद अंबु से सिंचित धरणी पर प्रकटी सेवा की कला।
ऊर्जस्वित नव तरुण बढ़े हैं नव्य इला का दिव्य श्रृंगार किए,
पावनता शुचिता समरसता का अंतस में दृढ़ संकल्प लिए।
शक्र धनुष से दीप्त विहान पर जाग उठी मानव की पावन प्रीत,
अखंड पुरुषार्थ की वेदी पर गूंज उठा सुंदर मंगल नव गीत।

Friday, September 4, 2026

शिक्षक वही है

       शिक्षक  वही है
जो तिमिर हरकर हृदय में, ज्ञान का नव भोर कर दे,
जो ढलते हुए संकल्प में, अटूट धैर्य और संबल भर दे।
परस्पर सहयोग की पावन रीती से, जो सबको जोड़ता है,
विपदाओं के थपेड़ों में भी, जो मुड़ना और लड़ना सिखाता है,
जो अज्ञान रूपी पाषाण को तराश कर गढ़ दे, वास्तव में शिक्षक वही है।

Saturday, October 18, 2025

रावण का उद्घोष: "मैं तुममें शेष हूँ"

काष्ठ और तृण के ढाँचे को, तुमने पावक में झोंक दिया,
लपटों की भीषण ज्वाला ने, मेरा नश्वर तन सोख लिया।
तुम विजय-नाद का दंभ लिए, हँसते हो अपनी अज्ञानता पर,
पर ध्यान से देखो राख मेरी, मैं आज भी तुममें शेष हूँ।
जो दंभ तुम्हारे मानस में, जो लोभ तुम्हारे नयनों में,
मैं श्वास ले रहा हूँ अब तक, उन काम-क्रोध के स्पंदनों में।
तुम जिसे मरा समझ बैठे हो, वह मेरा अंतकाल नहीं,
हर कलुषित सोच के साए में, मैं युग-युग से तुममें शेष हूँ।
तुम प्रतिवर्ष जलाते हो मुझे, अपनी दुर्बलता छिपाने को,
एक झूठे आत्म-संतोष तले, अंतस की मलीनता दबाने को।
जब तक ईर्ष्या, छल और कपट, इस मानव-मन का हिस्सा है,
तब तक यह रावण मरा नहीं, मैं जीवित ही तुममें शेष हूँ।
मत करो ढोंग इस विजय का, तुम पराजित हो अपने मन से,
मैं अमर तत्व बन व्याप रहा, इस कलयुग के कण-कण में।
जब तक न मिटेगी पाशविकता, तब तक मेरा अवसान नहीं,
पहचानो अपने भीतर मुझे, मैं तुममें शेष हूँ।
 

Tuesday, September 5, 2023

पर - कल्याण

क्षुधित कंठ, व्याकुल नयन, विप्रदा की है मार,
अकिंचनता के तिमिर में, सिसक रहा संसार।
सूनी छत और टूटा आँगन, सहते ठंडा घाम,
ग़रीबों का इस दुनिया में, कोई न लेता नाम।
पर-हित में जो जी सके, वही मनुज गतिमान,
सच्ची मानवता यही, जीवें पर-कल्याण।
औरों के हित जीना सीखो, छोड़ो स्वार्थ अपार,
दीन-हीन के कष्ट का, जो बन सके आधार।

Saturday, October 17, 2020

सच की दस्तक ने मुझे उत्कृष्ट लेखन अवार्ड से सम्मानित किया उनका बहुत बहुत आभार 🙏🙏🙏



 

शिवराज आनंद

व्यक्तिगत जानकारी- नाम: शिवराज आनंद (लेखन नाम)- पूरा नाम: शिव कुमार साहू- जन्म तिथि: 4 मई, 1987- जन्म स्थान: सोनपुर, तहसील रामानुज नगर, सूरज...