सद्भाव का सबेरा
स्नेह-सलिल की बहे नदिया,
मिटे द्वेष की मलिन घड़ियाँ।
नीले नभ में प्रेम छाए,
सारे जग में उजाला भर जाए।
मिटे द्वेष की मलिन घड़ियाँ।
नीले नभ में प्रेम छाए,
सारे जग में उजाला भर जाए।
सत्य, सुसंस्कृत, सुंदर बोल,
खोलें बंद दिलों के द्वार अनमोल।
लोचन-मन में करुणा जागे,
हर मन से अब बैर भागे।
खोलें बंद दिलों के द्वार अनमोल।
लोचन-मन में करुणा जागे,
हर मन से अब बैर भागे।
जीवन-उपवन महक उठे अब,
हाथ मिलाकर चलें यहाँ सब।
अमृत-सम मीठा वचन सुनाएँ,
घर-आँगन खुशियों से सजाएँ।
हाथ मिलाकर चलें यहाँ सब।
अमृत-सम मीठा वचन सुनाएँ,
घर-आँगन खुशियों से सजाएँ।
सूरज-सी किरणें बिखेरें,
भटके राही की राहें सँवारें।
पावन धरती स्वर्ग बन जाए,
मुस्कान हवा में तैरती आए
भटके राही की राहें सँवारें।
पावन धरती स्वर्ग बन जाए,
मुस्कान हवा में तैरती आए
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