Saturday, October 17, 2020

सच की दस्तक ने मुझे उत्कृष्ट लेखन अवार्ड से सम्मानित किया उनका बहुत बहुत आभार 🙏🙏🙏



 

Sunday, October 4, 2020

गौरव सूरजपुर का



              गौरव सूरजपुर का

विंध्य की गोद में सोई, अनुपम छटा निराली है,
महानदी की निर्मल धारा, लाती यहाँ खुशहाली है।

दण्डबुल्ला और सूर्यपुर था, जिसका वैभवशाली इतिहास,
सूरजपुर की पावन माटी, रचती नित नया विश्वास।

सरगुजा के अंचल से जन्मा, यह अनुपम भू-भाग प्रिय,
सूरजपुर की पावन माटी, सबको लगती बेहद प्रिय।

कुदरगढ़ की ऊँची चोटी पर, है माँ बागेश्वरी का धाम,
श्रद्धा से झुकता मस्तक है, मिलता पल में मन को विश्राम।

रकसगंडा के जलप्रपात में, झर-झर झरता राग नया,
तमोर पिंगला के जंगल में, पत्थरों का है बाग नया।

साल और सागौन के वृक्ष यहाँ, जो झूम रहे हैं चारों ओर,
इस पावन हरियाली अंचल में, नाच रहे हैं वन में मोर।

गोंड़, पण्डो और चेरवा की, यह सुंदर अद्भुत थाती है,
करमा, सुआ और सैला धुन पर, उमंग जगाती यह माटी है।

सरल हृदय और सहज भाव है, यहाँ के सीधे लोगों में,
अमृत-रस घुला हुआ सा है, यहाँ के मीठे बोलों में।

खेतों की सोंधी खुशबू में, यहाँ श्रम की सच्ची कहानी है,
महानदी और रेण की लहरों में, बहता कल-कल पावन पानी है।

सुदूर दक्षिण के आँचल में पावन, शिवपुर की सुन्दर गुफा महान,
प्राकृतिक जल से अभिषिक्त, विराजमान हैं भोले भगवान।

कुम्दा-गुरमाता की पावन महिमा, साऊब का अद्भुत कोना,
कण-कण में मर्यादा बसती है, राम नाम का सुंदर गहना।

पूर्व दिशा के पावन पथ पर, वैभव का उजियारा है,
देवीपुर में माँ महामाया ने, अपना रूप सँवारा है।

पश्चिम में सरसोर की महिमा, गंगा जैसी पावन धार,
लहरें छूकर पावन करतीं, भोले का नित ही श्रृंगार।

इस तपोभूमि में ऋषि-मुनियों की, भक्ति का बहता मधुमास,
पश्चिम की यह पावन माटी, लाती जीवन में उल्लास।

सूरजपुर घाटी का, कण-कण एक अनमोल रत्न,
शत-शत नमन है तुझको सुंदर, जय-जय छत्तीसगढ़ के चमन!


Wednesday, January 29, 2020

बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं

हे वरदायिनी मुझे वर दे मैं नित्य आपका उपासक बन आप की सेवा करना रहूं। बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं जय सरस्वती..

Thursday, October 24, 2019

माता विसर्जन

विसर्जनोपरांत सरिता, नीरद निस्तब्ध है खड़ा,
पवन का प्रवेग देखो, मंद-मंथर है पड़ा।
धान्य-क्षेत्र की हैं बालियाँ, अवनत शीश झुका रहीं,
तज कलरव विहंगम-वृन्द, मौन गुंजन गा रहीं।
नभ में मेघमाला आज, अश्रुपूरित भारी हुई,
धरणी की धरा उर्वरा, विकल सी उजाड़ी हुई।
कम्पित है दीप-शिखा, तुलसी-चौरा विषाद-युक्त है,
अंतःकरण विलाप-रत, नयन अश्रु-सिक्त है।
प्रतिमा-विसर्जन यह नहीं, पंचतत्व में विलय है,
माँ अंतर्धान कहाँ हुई? कण-कण अक्षय लय है।

Saturday, October 12, 2019

दबंग दुनिया समाचार पत्र का आभार






दबंग दुनिया समाचार पत्र के संवादाता का आभार की उन्होंने ने मुझे अपनी लोक प्रिय समाचार पत्र के प्रकाशन दिनांक 1 अक्टूबर 2019 में स्थान दिया. 

सद्भाव का सबेरा

   स्नेह-सलिल की बहें नदियाँ, मिटें द्वेष की मलिन घड़ियाँ। नीले नभ में प्रेम छाए, सारे जग में उजाला भर जाए। सत्य, सुसंस्कृत, सुंदर बोल, खोले...