Saturday, October 17, 2020
Monday, March 9, 2020
Wednesday, January 29, 2020
बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं
हे वरदायिनी मुझे वर दे मैं नित्य आपका उपासक बन आप की सेवा करना रहूं। बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं जय सरस्वती..
Tuesday, December 31, 2019
Saturday, October 12, 2019
Wednesday, November 15, 2017
मानवता की 'डगर' पर
हे प्रिय! तुम मुझे भी अपना लो,
गुमराह हूँ, कोई राह दिखा दो।
यूँ न छोड़ो रण में एकाकी अभिमन्यु सा,
मुझे भी साथ ले चलो मानवता की डगर पर।
वहाँ बड़े सत्यवादी हैं,
सत्य-अहिंसा के पुजारी हैं।
वे रावण के अत्याचार को मिटा देते हैं,
हो गर हाहाकार, तो उसे थाम लेते हैं।
इस पथ पर कोई ज़ंजीर नहीं,
जो बाँधकर जकड़ सके।
पथ पर कोई विघ्न नहीं,
जो रोककर अकड़ सके।
है यह मानवता की डगर निराली,
जीत ले जो प्रेम, वही खिलाड़ी।
यहाँ मज़हब न भेदभाव,
सर्वधर्म समभाव से जीते हैं,
वक़्त आए तो हँसकर ज़हर पीते हैं।
फिर तो स्वर्ग यहीं है, नर्क यहीं है,
मानव मानव ही है, बस सोच का फ़र्क़ है।
हे प्रिय! इस राह से हम न हों किनारे,
न हताश हों, न निराश हों,
मन में आस व विश्वास हो।
फिर आओ जग में जीकर,
जीवन-ज्योत जला दें।
सुख-शांति के नगर को,
स्वर्ग सा सजा दें।
आज भी राम हैं कण-कण में,
भारत-भारती के जन-जन को बता दें।
Tuesday, January 17, 2017
उठो युवा,तुम उठो ऐसे. . .
उठो युवा तुम उठो ऐसे
उठो युवा तुम उठो ऐसे
चक्रवात में तूफ़ाँ उठता है जैसे
हाँ, अब कौन युवा तुम्हारे सिवा?
रक्षक प्यारे देश के
तुम चाहते तो तांडव मचे
देर है तुम्हारे उस वेश क
अब तो सब से आशा भी टूटी
लगती है अब दुनिया भी झूठी
कैसी माँ? कि कैसा लाल?
जो जनकर भी जने क्या लाल?
जो देश की गरिमा बचा सके
ध्वंस कर रावण-राज धरा से
एक आदर्श रामराज्य बना सके
तुम देश के आन-बान हो
हिंदू हो या मुसलमान हो
किसी मज़हब के नहीं, तुम मातृभूमि के लाल हो
तुम काल के भी महाकाल हो
फिर क्यों अंजान हो?
क्या नेताओं से परेशान हो?
ओह! कहीं विलीन न हो मेरे सपनों का भारत!
हे महारत! तुममें है सामर्थ्य
रोक दो यह अनर्थ
अगर है मोहब्बत, तो अपनी यौवन शक्ति जगा दो।
आज अपने युग से अत्याचार मिटा दो।।
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