Saturday, October 17, 2020

सच की दस्तक ने मुझे उत्कृष्ट लेखन अवार्ड से सम्मानित किया उनका बहुत बहुत आभार 🙏🙏🙏



 

Wednesday, January 29, 2020

बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं

हे वरदायिनी मुझे वर दे मैं नित्य आपका उपासक बन आप की सेवा करना रहूं। बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं जय सरस्वती..

Saturday, October 12, 2019

दबंग दुनिया समाचार पत्र का आभार






दबंग दुनिया समाचार पत्र के संवादाता का आभार की उन्होंने ने मुझे अपनी लोक प्रिय समाचार पत्र के प्रकाशन दिनांक 1 अक्टूबर 2019 में स्थान दिया. 

Wednesday, November 15, 2017

मानवता की 'डगर' पर

हे प्रिय! तुम मुझे भी अपना लो,
गुमराह हूँ, कोई राह दिखा दो।
यूँ न छोड़ो रण में एकाकी अभिमन्यु सा,
मुझे भी साथ ले चलो मानवता की डगर पर।
वहाँ बड़े सत्यवादी हैं,
सत्य-अहिंसा के पुजारी हैं।
वे रावण के अत्याचार को मिटा देते हैं,
हो गर हाहाकार, तो उसे थाम लेते हैं।
इस पथ पर कोई ज़ंजीर नहीं,
जो बाँधकर जकड़ सके।
पथ पर कोई विघ्न नहीं,
जो रोककर अकड़ सके।
है यह मानवता की डगर निराली,
जीत ले जो प्रेम, वही खिलाड़ी।
यहाँ मज़हब न भेदभाव,
सर्वधर्म समभाव से जीते हैं,
वक़्त आए तो हँसकर ज़हर पीते हैं।
फिर तो स्वर्ग यहीं है, नर्क यहीं है,
मानव मानव ही है, बस सोच का फ़र्क़ है।
हे प्रिय! इस राह से हम न हों किनारे,
न हताश हों, न निराश हों,
मन में आस व विश्वास हो।
फिर आओ जग में जीकर,
जीवन-ज्योत जला दें।
सुख-शांति के नगर को,
स्वर्ग सा सजा दें।
आज भी राम हैं कण-कण में,
भारत-भारती के जन-जन को बता दें।

Tuesday, January 17, 2017

उठो युवा,तुम उठो ऐसे. . .


उठो युवा तुम उठो ऐसे
उठो युवा तुम उठो ऐसे
चक्रवात में तूफ़ाँ उठता है जैसे
हाँ, अब कौन युवा तुम्हारे सिवा?
रक्षक प्यारे देश के
तुम चाहते तो तांडव मचे
देर है तुम्हारे उस वेश क

अब तो सब से आशा भी टूटी
लगती है अब दुनिया भी झूठी
कैसी माँ? कि कैसा लाल?
जो जनकर भी जने क्या लाल?
जो देश की गरिमा बचा सके
ध्वंस कर रावण-राज धरा से
एक आदर्श रामराज्य बना सके

तुम देश के आन-बान हो
हिंदू हो या मुसलमान हो
किसी मज़हब के नहीं, तुम मातृभूमि के लाल हो
तुम काल के भी महाकाल हो
फिर क्यों अंजान हो?
क्या नेताओं से परेशान हो?
ओह! कहीं विलीन न हो मेरे सपनों का भारत!
हे महारत! तुममें है सामर्थ्य
रोक दो यह अनर्थ
अगर है मोहब्बत, तो अपनी यौवन शक्ति जगा दो। 
आज अपने युग से अत्याचार मिटा दो।। 





माता विसर्जन

विसर्जनोपरांत सरिता, नीरद निस्तब्ध है खड़ा, पवन का प्रवेग देखो, मंद-मंथर है पड़ा। धान्य-क्षेत्र की हैं बालियाँ, अवनत शीश झुका रहीं, तज कलरव ...