Tuesday, October 13, 2026

नवरात्रि

आश्विन के पावन भाल पर, नव-रश्मि का संधान हुआ,
तिमिर-हारिणी जगदम्बा का, धरा पर फिर आह्वान हुआ।
प्रतिपदा की पावन वेला में, घट-स्थापना की शुचिता है,
शैलपुत्री के दृढ़ संकल्प से, मानव-चेतना दीक्षिता है।
ब्रह्मचारिणी का तप-तेज अमित, अंतस का संताप हरे,
चंद्रघंटा की अलौकिक ध्वनि, भय और व्याकुलता दूर करे।
कुष्मांडा की मंद हँसी से, ब्रह्मांड हुआ उद्भासित है,
स्कंदमाता के वात्सल्य से, यह चराचर जग सुरभित है।
कात्यायनी का खड्ग प्रखर, अन्याय का मर्दन करता,
कालरात्रि का उग्र रूप, तम-अज्ञान का हरण करता।
महागौरी के श्वेत वसन में, करुणा का अवगाहन है,
सिद्धिदात्री की कृपा-दृष्टि, मोक्ष का दिव्य आमंत्रण है।
यह नौ रात्रियां केवल उत्सव नहीं, आत्म-शुद्धि का अनुष्ठान हैं,
भीतर छिपे महिषासुर का, वध करने का महा-अभियान हैं।
सात्विक भक्ति के दीप जलें, दसों दिशाएं गुंजायमान हों,
माँ दुर्गा के आशीष से, संपूर्ण विश्व में कल्याण हो।

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नवरात्रि

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