Saturday, October 17, 2020
Monday, March 9, 2020
Wednesday, January 29, 2020
बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं
हे वरदायिनी मुझे वर दे मैं नित्य आपका उपासक बन आप की सेवा करना रहूं। बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं जय सरस्वती..
Tuesday, December 31, 2019
Thursday, October 24, 2019
माता विसर्जन
विसर्जनोपरांत सरिता, नीरद निस्तब्ध है खड़ा,
पवन का प्रवेग देखो, मंद-मंथर है पड़ा।
पवन का प्रवेग देखो, मंद-मंथर है पड़ा।
धान्य-क्षेत्र की हैं बालियाँ, अवनत शीश झुका रहीं,
तज कलरव विहंगम-वृन्द, मौन गुंजन गा रहीं।
तज कलरव विहंगम-वृन्द, मौन गुंजन गा रहीं।
नभ में मेघमाला आज, अश्रुपूरित भारी हुई,
धरणी की धरा उर्वरा, विकल सी उजाड़ी हुई।
धरणी की धरा उर्वरा, विकल सी उजाड़ी हुई।
कम्पित है दीप-शिखा, तुलसी-चौरा विषाद-युक्त है,
अंतःकरण विलाप-रत, नयन अश्रु-सिक्त है।
अंतःकरण विलाप-रत, नयन अश्रु-सिक्त है।
प्रतिमा-विसर्जन यह नहीं, पंचतत्व में विलय है,
माँ अंतर्धान कहाँ हुई? कण-कण अक्षय लय है।
माँ अंतर्धान कहाँ हुई? कण-कण अक्षय लय है।
Saturday, October 12, 2019
Wednesday, November 15, 2017
मानवता की 'डगर' पर
हे प्रिय! तुम मुझे भी अपना लो,
गुमराह हूँ, कोई राह दिखा दो।
यूँ न छोड़ो रण में एकाकी अभिमन्यु सा,
मुझे भी साथ ले चलो मानवता की डगर पर।
वहाँ बड़े सत्यवादी हैं,
सत्य-अहिंसा के पुजारी हैं।
वे रावण के अत्याचार को मिटा देते हैं,
हो गर हाहाकार, तो उसे थाम लेते हैं।
इस पथ पर कोई ज़ंजीर नहीं,
जो बाँधकर जकड़ सके।
पथ पर कोई विघ्न नहीं,
जो रोककर अकड़ सके।
है यह मानवता की डगर निराली,
जीत ले जो प्रेम, वही खिलाड़ी।
यहाँ मज़हब न भेदभाव,
सर्वधर्म समभाव से जीते हैं,
वक़्त आए तो हँसकर ज़हर पीते हैं।
फिर तो स्वर्ग यहीं है, नर्क यहीं है,
मानव मानव ही है, बस सोच का फ़र्क़ है।
हे प्रिय! इस राह से हम न हों किनारे,
न हताश हों, न निराश हों,
मन में आस व विश्वास हो।
फिर आओ जग में जीकर,
जीवन-ज्योत जला दें।
सुख-शांति के नगर को,
स्वर्ग सा सजा दें।
आज भी राम हैं कण-कण में,
भारत-भारती के जन-जन को बता दें।
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शिवराज आनंद
व्यक्तिगत जानकारी- नाम: शिवराज आनंद (लेखन नाम)- पूरा नाम: शिव कुमार साहू- जन्म तिथि: 4 मई, 1987- जन्म स्थान: सोनपुर, तहसील रामानुज नगर, सूरज...
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