भूत ...
( अंद्विश्वास की कुरीतियों को दूर करने के लिए एक कथा भूत ... । ) आँधी व घटा तो आती ही रहती थी पर जिस दिन श्याम बाबू अपने बेटे को खेल सिखाने के लिए खेल के मैदान में ले जा रहे थे । उस दिन इतनी भयंकर आँधी आई की श्याम बाबू चल न सके , अचानक गिर पड़े । उन्हें देखकर कुछ ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो निष्प्राण है पर उनकी सहसा आँखें खुली तो देखा एक बूढी औरत उनके करीब आ रही थी । श्याम बाबू भय रहित आँखों से पर्दा हटाया और लोहा लेने के लिए तैयार हो गए । उनके इस वीरता को देख वह बूढी औरत काफूर हो चली . .. आखिर श्याम बाबू को संदेह हो गया कि 'भूत' ही है । वे उतना भूत -प्रेतों से परिचित नहीं थे , बस इतना सुना था कि एक व्यक्ति के मर जाने पर उसके बदन पर असुर वृत्तियों के सूचक और पंजे थे। आप-बीती से सहमें ... बस उसी को नज़र में बसाते ... । की ओ ...... । खेल का मैदान ...... मेरा पुत्र .. और... वह बुढ़िया ... । वह कोई जादू तो नहीं ... वे मन को घोड़ें की तरह दौड़ने लगे ... । आखिर उनके साथ ऐसी पहली घट...