जो तिमिर हरकर हृदय में, ज्ञान का नव भोर कर दे,
जो ढलते हुए संकल्प में, अटूट धैर्य और संबल भर दे।
परस्पर सहयोग की पावन रीती से, जो सबको जोड़ता है,
विपदाओं के थपेड़ों में भी, जो मुड़ना और लड़ना सिखाता है,
जो अज्ञान रूपी पाषाण को तराश कर गढ़ दे, वास्तव में शिक्षक वही है।
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