Saturday, January 11, 2025
Friday, April 7, 2023
Thursday, January 26, 2023
जीवन की सोच
जीवन की सोच
(हमें बाधाएं और कठिनाईयां कभी रोकती नहीं है अपितु मज़बूत बनाती हैं)
लफ़्ज़ों से कैसे कहूं कि मेरे जीवन की सोच क्या थी ? आखि़र मैंने भी सोचा था कि पुलिस बनूंगा, डाॅ बनूंगा किसी की सहायता करके ऊॅचा नाम कमाऊंगा पर नाम कमाने की दूर... जिन्दगी ऐसे लड़खड़ा गई जैसे शीशे का टुकङा गिर पड़ा हो फर्क इतना सा हो गया जितना सा जीव और निर्जीव मे होता है । मै क्यों निष्फल हुआ ?
हां, मैं जिस कार्य को करता था उसमें सफल होने की आशा नहीं करता था मेहनत, लग्न से जी चुराता था इसलिए मेरे सोच पर पानी फेर फेर आया । गुड़- गोबर हो गया। अगर मैने मेहनत, लग्न से जी लगाया होता तो किसी भी मंज़िल पा सकता था ऊंचा नाम कमा था। अभी भी मेरे मन में कसक होती है।' जब वे लम्हें याद आते हैं और दिल के टुकड़े-टुकड़े कर जाते हैं। कि काश, मैं उस दौर में समय की कीमत को जाना और समझा होता : जिस समय को युंही खेल - कुद , मौज- मस्ती मे लुटा दिया । बहरहाल, 'अब मै गड़े मुर्दे उखाङ कर दिल को ठेस नही लगाऊंगा.. वरन् उन दिलों में नव -नीव डालकर भविष्य का सृजन करुंगा ।'
हां, मै अल्पज्ञ हूं। किंतु इतना साक्षर भी हूं कि अच्छे और बुरे व्यक्ति की पहचान कर सकूं।उन दोनों की तस्वीर समाज के सामने खींच सकूं । फिर यह कह सकूं कि ' सत्यवान और कुटेव इंसान की सोच मे जमीं और आसमां से भी अधिक अंतर होता है चाहे क्यों ना एक - दुजे का मिलन होता हो मत -भेद जरूर होता है।
उन दोनों की ख़्वाहिश अलग सी होती है ख़्वाबों में पृथक-पृथक इरादें लाते हैं ।सु-कृत्य और कु-कृत्य।सु कृत्यों मे जो स्थान किसी कि सहायता करना ,भुले -भटके हुए को वापस लाना या ये कहें कि ऐसे सुकर्म जिनका फल सुखद होता है किन्तु वहीं कुकृत्य करने वाले कि सोच किसी कि ज़िल्लत करना , किसी पर इल्ज़ाम लगाने जैसे अशोभनीय और निंदनीय कर्मो से होता है
सभी कर्मो का इतिहास 'कर्म साक्षी' है। फिर कैसे राजा लंकेश के कपट -कर्म और मन के कलुषित - भाव ने उसके साथ समुचे लंका का पतन कर डाला।'माना कि झुठ के आड़ से किसी की जिंदगी सलामत हो जाती है तो उस वक्त के लिए झूठ बोलना सौ -सौ सत्य के समान है। परंतु निष्प्रयोजन मिथ्यात्व क्यों? फिर तो इस संसार में सत्य और सत्यवान की भी परीक्षा हुई है और सार्थक सोच की शक्ति ने विजय पाई है।'
'महापुरुष हो या साधारण सभी परिवारीक स्थित मे मलिन होकर विषम परिस्थितियों में खोए रहते है । कहने का तात्पर्य है कि सम्पूर्ण ' 'जीवन की सोच ' सत्कर्म में होना चाहिए ।
मै तो यह नही कह सकता कि सोच करने से सदा आप सफल हो जाएंगे किन्तु मेहनत, लग्न और विश्वास से रहे तो एक दिन चाँद-तारे भी तोड़ लाएंगे
कहीं आप भी ऐसा कार्य न कर बैठे कि पीछे आपको आठ- आठ आंसू रोना पड़े।आज मुझे मालूम हुआ कि जीवन की सोच कैसी होनी चाहिए । मै तो असफल हुआ।ओठ चाटने पर मेरी प्यास नही बुझी ।लेकिन आप ज्ञानवान हैं सोच समझकर कार्य करें ।आत्मविश्वास से मन की एकाग्रता से नहीं तो आपको भी आठ - आठ आंसू रोने पड़ेंगे ।
शिवराज आनंद
Sunday, August 15, 2021
Thursday, December 24, 2020
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Monday, March 9, 2020
Wednesday, January 29, 2020
बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं
हे वरदायिनी मुझे वर दे मैं नित्य आपका उपासक बन आप की सेवा करना रहूं। बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं जय सरस्वती..
Monday, January 13, 2020
बड़ों का भाव
हम उनका सम्मान करते हैं उनके आज्ञा का पालन करते हैं उनको चैन और सुकून देते हैं क्या इसलिए कि हम उनसे डरते हैं जी नहीं इसलिए कि हम दूसरों का सम्मान करना उनको चैन और सुकून देना अपना कर्तव्य भाव के साथ धर्म भी समझते हैं। आगे
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