गौरव सूरजपुर का (कविता)
विंध्य की गोद में सोती, अनुपम छटा निराली है, महानदी की निर्मल धारा, लाती यहाँ खुशहाली है।
दंदबुल्ला और सूर्यपुर था, जिसका वैभवशाली इतिहास,
सूरजपुर की पावन माटी, रचती नित
नया विश्वास।
सरगुजा के अंचल से जनमा, यह अनुपम भू-भाग प्रिय,
सूरजपुर की पावन माटी, सबको लगती बेहद प्रिय।
कुदरगढ़ की ऊँची चोटी, यहाँ है माँ बागेश्वरी का धाम,
श्रद्धा से झुकता मस्तक है, मिलता पल में मन को विश्राम।
रक्सगंडा के जलप्रपात में, झर-झर झरता राग नया,
तमोर पिंगला के जंगल में, पत्थरों का है बाग नया।
शाल और सागौन के वृक्ष यहाँ, जो झुम रहे हैं चारों ओर,
इस पावन हरियाली अंचल में, नाच रहे हैं वन में मोर।
गोंड, पाँडो और चेरवा की, यह सुंदर अद्भुत थाती है,
करमा, सुआ और सैला धुन पर, उमंग जगाती यह माटी है।
सरल हृदय और सहज भाव है, यहाँ के सीधे लोगों में,
अमृत रस घोला हुआ सा है, यहाँ के मीठे बोलों में।
खेतों की सोंधी खुशबू में, यहाँ श्रम की सच्ची कहानी है,
महान और रेणुक की लहरों में, बहता कल-कल पावन पानी है।
सूरजपुर घाटी का, कण-कण एक अनमोल रत्न, शत-शत नमन है
तुझको सुंदर, जय-जय छत्तीसगढ़ के चमन!
पद दक्षिण के आँचल में पावन, शिवपुर की सुन्दर गुफा महान,
प्राकृतिक जल से अभिषेचित, विराजमान हैं भोले भगवान।
कौना गुरमाता की पावन महिमा, साऊब का अद्भुत कौना,
कण-कण में मर्यादा बस्ती है, राम नाम का सुंदर गहना।
पूर्व दिशा के पावन पथ पर, वैभव का उजियारा है, देवीपुर में माँ महामाया ने, अपना रूप संवारा है।
पश्चिम में सरसोर की महिमा, गंगा जैसी पावन धार,
लहरें छूकर पावन करतीं, भोले का नित ही श्रृंगार।
इस तपोभूमि में ऋषि-मुनियों की, भक्ति का बहता मधुमास,
पश्चिम की यह पावन माटी, लाती जीवन में उल्लास।
सूरजपुर घाटी का, कण-कण एक अनमोल रत्न, शत-शत नमन है तुझको सुंदर, जय-जय छत्तीसगढ़ के चमन!
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